शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

चली चिरैया सैर पर


दोहे 
1
अब गाँवन ते जुडि गईं/सडकै चारिव वार
लिलगाइन के झुंड का/गाँसै लाग सियार।
2
लखनउवन ते हारि गे/गाँवन क्यार किसान
भीख माँगि रोटी जुरै/सिकुडि गये खरिहान।
3
टट्टर आवा गाँव मा/सबके बैल बिकान
फिर टट्टर की किस्त मा/ बिका खेतु खरिहान।
4
बिरवन की छाँही नही/टूटै जहाँ थकान
अब वुइ बागै कटि गयीं/बनिगे नए मकान।
5
रोज रंगु बदलै लगे/गिरगिट हैं परधान
कुछ चूसैं-कुछ थूकि दें/जैसे मुह का पान।
6
वहै डगर-पीपर वहै/वह कूटी-वहु ठाँव
सब कुछु है मुलु/अब नही है पहिले जस गाँव।
7
गडही सगरी पटि गईं/कुइयाँ गईं बिलाय
चापाकल अउधाँ परा/ पानी लाग बिकाय।
8
करिया अच्छर आदमी/पत्ता अइस सरीर
अँगरेजी मा लिखी गइ/ फत्ते की तकदीर।

9
अब न आगि माँगै कोऊ/अब न होय अगियार
मेल मुरौवति अब नही/कहाँ तीज त्यौहार।
10
खरखट्टी खटिया बिछी/नींबी वाली छाँह
जात-पात की बात पर/नत्था करै सलाह।
11
फसल कटी-बाली बजीं/भरि गइ उनकी जेब
नई बहुरिया आय गइ/पहिरि नई पाजेब।
12
चोंच लडावै मोरनी/उडै मुरैला संग
धरती मानुस बिरछ लौ/नाचैं उनके संग।
13
पढे लिखे हुसियार भे/ठग बाबू बबुआन
मेहनति अबहूँ करति हइ/दुखिया रोज किसान।
14
सौदा लइ-लइ आ रहे/नए बिसाती रोज
गाँवन-गाँवन हुइ रही/अब गहकिन की खोज।
15
पढि लिखि कै हुसियार भे/ जहाँ लरिकवा चंट
अब न बही खाता चलै/हुँआ न पोथी घंट।
*भारतेन्दु मिश्र

5 टिप्‍पणियां:

ashokbajajcg.com ने कहा…

रोचक प्रस्तुति .

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

सदा की भांति उम्दा दोहे हैं। चिरैया की सैर यूं ही जारी रहे। बधाई।

भारतेंदु मिश्र ने कहा…

आप दोनो का धन्यवाद

riyaz ने कहा…

arey badakau abhi thod padhen raahey badi nik laag raha tumhar upnayaas maza aai gava waarey awdhi kere laal jeet raho tumka bhagwaan kub lambi umar deve sach ma ssena garv se phool gava!!!

rsverma8362@gmail.com ने कहा…

दद्दा बहुतै नीकि दोहा हवैं। निरुत्तर कइ दीन्हेव। बधाई।